जीवन रूपी हर दर्पण में, तू खुद ही धोखा खाएगा
हैं नई उमंगे भरी हुई, तेरे जीवन के हर क्षण में
अंतिम सांसो तक लड़ता है, एक वीर यहां जीवन रण में
किस्मत भी बदल दिया करता, मानव अब तो अपने दम पर
धरती जल, वायु सभी वश में, है वश में आग और अंबर
है जीवन में इतनी ज्योति, फिर जीता क्यों है मरा हुआ
क्यों नैनो को है बंद किए, तम के सागर से डरा हुआ
यूं हार जो मान लिया तट पर, इस पार खड़ा रह जाएगा
यह जीवन है संघर्ष तेरा, कब तक इसको झुठलाएग
यह भावी जीवन है तेरा, तुझको ही इसे जीना होगा
मजबूत बना के रख खुद को, अमृत संग विष पीना होगा
चलते चलते तेरे पथ में, एक बड़ा सा झोंका आएगा
ना होगी स्थिरता मन में, सब कुछ संग लेकर जाएगा
तब होश हवास तू खो करके, एक गलत रास्ता चुन लेगा
अपने जीवन का चक्रव्यू, अपने हाथों से बुन लेगा
फिर हार के बाजी लौटेगा, तन मन धन से पछताएगा
यह जीवन है संघर्ष तेरा, कब तक इसको झुठलाएगा
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