Tuesday, April 14, 2020

शाखा और सुमन

"शाखा और सुमन" 
 By-Mohd.Rizwan

मैं शाखा हूं सुमन तुम हो जरा अहसास तो कर लो 
मोहब्बत तुमसे करते हैं यह दूरी पास तो कर लो 
के पागल हो गया है यह दीवाना प्यार में तेरे 
दो पल सीता बनकर संग में वनवास तो कर लो

कि मैं यह कह नहीं सकता तेरी हर बात नाजुक है 
मगर विश्वास है मेरा तेरे जज्बात नाजुक हैं 
के हंस कर दे दिया होता दिया मैं तेरे हाथों में 
मुझे मालूम था लेकिन तेरे वह हाथ नाजुक हैं

रो रो कर किसी गम में सुबह से शाम मत करना 
अनजानी बाहों में खुद को कभी नाकाम मत करना 
मेरी बातों से तुम को गर चिढ़न होती है तो सुन लो 
के कत्लेआम कर देना मगर बदनाम मत करना

प्रेमी भाव है मुझ में करूं इनको तरोताजा 
आंखें मूंदकर खोलूं मोहब्बत का मैं दरवाजा 
तेरा आशिक नहीं मर्दानगी का खुला रुस्तम 
के मजनू है खड़ा इस ओर लैला बन के तू आजा

मामले मोहब्बत के

"मामले मोहब्बत के" 
 By- Mohd. Rizwan

मामले मोहब्बत के यूं न सुलझ पायेंगे
कोशिशें बढ़ेंगी तो और उलझ जायेंगे
मुंह को बंद रखो, बस धड़कनों को चलने दो
आज उसकी बाहों में, ही यह शाम ढलने दो
नजरें प्यासी प्यासी और प्यार की गुजारिश हो
दोनों दिल ही मिल जाएं एक ऐसी बारिश हो
आसमा तड़प जाए उन दिलों की बातों से
दिन भी खुद में शर्माए उन हसीन रातों से
सुर्ख तेरे होठों से नाम बस कमा जाऊं
इश्क तो समंदर है इश्क में समा जाऊं

आप भगवान पर हम तो नादान हैं

वैसे भगवान हैं सब में बसते मगर  आपका रूप खुद में ही भगवान है  कोई गलती हुई माफ करना ज़रा  आप भगवान पर हम तो नादान हैं  एक बराबर का हम सबको द...