Tuesday, April 14, 2020

शाखा और सुमन

"शाखा और सुमन" 
 By-Mohd.Rizwan

मैं शाखा हूं सुमन तुम हो जरा अहसास तो कर लो 
मोहब्बत तुमसे करते हैं यह दूरी पास तो कर लो 
के पागल हो गया है यह दीवाना प्यार में तेरे 
दो पल सीता बनकर संग में वनवास तो कर लो

कि मैं यह कह नहीं सकता तेरी हर बात नाजुक है 
मगर विश्वास है मेरा तेरे जज्बात नाजुक हैं 
के हंस कर दे दिया होता दिया मैं तेरे हाथों में 
मुझे मालूम था लेकिन तेरे वह हाथ नाजुक हैं

रो रो कर किसी गम में सुबह से शाम मत करना 
अनजानी बाहों में खुद को कभी नाकाम मत करना 
मेरी बातों से तुम को गर चिढ़न होती है तो सुन लो 
के कत्लेआम कर देना मगर बदनाम मत करना

प्रेमी भाव है मुझ में करूं इनको तरोताजा 
आंखें मूंदकर खोलूं मोहब्बत का मैं दरवाजा 
तेरा आशिक नहीं मर्दानगी का खुला रुस्तम 
के मजनू है खड़ा इस ओर लैला बन के तू आजा

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