जाना है उस पार अगर, तो लहरों से लड़ना होगा
पर्वत शीर्ष के पत्थर जो, सूरज की गर्मी खाते हैं
फिर टूट वहां से घिस घिसकर, मोती सा बन जाते हैं
बनना है उस मोती सा, तो चोट तुझे सहना होगा
नौका है यह जीवन तेरा, तुझे ही नाविक बनना होगा
पथ तेरा कठिन है ओ राही, पर मंजिल भी अब दूर नहीं
चमकेगा तू उस सूरज सा, है जिसको कोई गुरूर नहीं
पर सूरज सा बनना है तो, सूरज बनकर जलना होगा
नौका का है यह जीवन तेरा, तुझे ही नाविक बनना होगा
है नहीं असंभव कुछ भी अब, बाधाएं भी जाएंगी दब
वंचित खानों को चित करने को, खड़े यहां तैयार हैं सब
लंबी उड़ान भरनी है तो, त्याग और तप करना होगा
नौका है यह जीवन तेरा, तुझे ही नाविक बनना होगा